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सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

सुन्दर सा सुमन खिलाया क्यों? (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)


मेरे वैरागी उपवन में,

सुन्दर सा सुमन सजाया क्यों?


सूने-सूने से मधुबन में,

गुल को इतना महकाया क्यो?



मधुमास बन गया था पतझड़,

संसार बन गया था बीहड़,


दण्डक-वन से, इस जीवन में,

शीतल सा पवन बहाया क्यों?



दिन-रैन चैन नही आता था,

मुझको एकान्त सुहाता था,


चुपके से आकर नयनों में,

सपनों का भवन बनाया क्यों?



नही हँसता था, नही रोता था,

नही अन्तर्मन को धोता था,


चुपके से आकर आँगन में,

मुझको दर्पण दिखलाया क्यों?



स्वर नही सजाना आता था,

नही साज बजाना आता था,


चुपके से कानों में आकर,

सुन्दर संगीत सुनाया क्यों?

10 टिप्‍पणियां:

  1. चुपके से कानों में आकर,
    सुन्दर संगीत सुनाया क्यों?

    अच्छी लाइनें हैं।
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. ... ... . क्यों?

    ताकि आप हमेशा प्रसन्नता के गीत गाते रहें

    और

    सबके मन को लुभाते रहें!

    जवाब देंहटाएं
  3. मयंक जी! आपकी कविताएँ मुझे बहुत अच्छी लगती हैं।
    लिखना बन्द न करें।
    बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  4. मयंक जी!
    गीत मन को छू गया।

    जवाब देंहटाएं
  5. शास्त्री जी!
    सुन्दर गीत पढ़वाने के लिए धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  6. मुझको दर्पण दिखलाया क्यों .....यूँ ही लिखते रहिये ....बहुत अच्छा लिखते हैं आप

    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  7. शास्त्री जी!
    बहुत दिनों के बाद नेट पर अच्छा गीत पढ़ने को मिला।
    बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  8. सुंदरतम अभिव्यक्ती. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  9. जैसे सुंदर भाव ...वैसी ही सुंदर अभिव्‍यक्ति....महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं..

    जवाब देंहटाएं

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