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गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009

‘‘कुम्हार अनुसूचित जाति के वास्तविक हकदार ’’

‘‘कुम्हार अनुसूचित जाति के वास्तविक हकदार ’’
अनुसूचित जाति के यदि पारिभाषिक शब्द पर विचार करें तो दलित वर्ग में आने वाली प्रत्येक जाति अनुसूचित वर्ग में आने की हकदार है । अब प्रश्न उठता है कि क्या कुम्हार जाति दलित वर्ग से सम्बन्ध रखती है ? इसका एक ही उत्तर है ‘‘हाँ’’ ।
प्रजापति समाज अर्थात कुम्हार जाति के व्यक्ति समाज के दलित-शोषत वर्ग के अन्तर्गत ही क्यांे आने चाहिए ? इसके अनेक प्रमाण पाठकों के सामने व्यक्त करना मैं अपना परम कर्तव्य समझता हूँ ।
देश की 80 प्रतिशत जनता ग्रामों में निवास करती है । आप यदि भौगोलिक परिस्थितियों पर गौर करें तो आपने पाया होगा कि पहले गाँव के एक कोने पर वाल्मीकि समाज के व्यक्ति का घर होता था तथा गाँव के दूसरे कोने पर कुम्हार का घर होता था । अर्थात समाज से अलग-थलग पडें हुए यह व्यक्ति होते थे । जबकि बढ़ई, लोहार आदि समाज के लोगें के घर गाँव के मध्य में होते थे । आखिर क्यों यह परम्परा थी ? क्या यह कारण इस समाज का दलित होना परिलक्षित नही करता है ?
मिट्टी के बरतन बनाने वाला कुम्हार समाज के अगड़े वर्ग के लोगों में अपने मिट्टी के बरतन पहुँचाता था । जहाँ उसके बनाये गये पात्रों का विधिवत् पूजन अर्चन पण्डित के द्वारा किया जाता था । बल्कि उसके बनाये कलश (घड़े) में सर्वप्रथम कलावा बाँधा जाता था, उसके बनाये दीपक से भगवान की आरती की जाती थी । लेकिन इन पात्रों के निर्माता कुम्हार कों शामिल भी नही होने दिया जाता था । उसका स्थान कहाँ था ? समाज व देश का संविधान बनाने वाले भली-भाँति जानते हैं परन्तु अनजान हैं, अतः यह बताना आवश्यक ही है कि विवाह-शादी में कुम्हार का स्थान द्वार पर होता था । जहाँ कि वैवाहिक कार्यों में भाग लेने वाले लोगों के जूते-चप्पल उतारे गये होते थे । वहीं पर बैठा यह दलित कुम्हार अपनी गुहार लगाता रहता था कि ‘‘यजमान पारिस (खाना) भिजवा दो, बच्चे भूखे हैं । इससे अधिक दुर्दशा इस समाज की और क्या होगी ? क्या यह कारण इस समाज का दलित होना नही दर्शाता है ।
अब मैं आपको महाराज मनु के युग में ले जाना चाहता हूँ । मनु महाराज ने अपनी मनुस्मृति में लिखा है ‘‘दशसूनासमं चक्रं दशचक्रसमो ध्वजः। दशध्वजसमो देशो दशवेशसमो नृपः।।’’
(मनुस्मृति 4/85)
अर्थ - दश हत्या के समान चक्र अर्थात् कुम्हार, गाड़ी से आजीविका करनेवाले, दश चक्र के समान धोबी तथा मद्य को निकाल कर बेचनेवाले, दश ध्वज के समान वेश अर्थात वेश्या, भड़ुआ, भांड ,दूसरे की नकल करने वाले और अन्यायी राजा के यहाँ का अन्न अतिथि ग्रहण न करें ।
इस श्लोक के अनुसार तो कुम्हार दलित ही नही अछूत की श्रेणी में भी आते हैं । अतः कुहार जाति को अनुसूचित जाति वर्ग में न रखना सरकार का सरासर अन्याय है ।
अब यदि राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक एक भी प्रजापति समाज अर्थात् कुम्हार जाति का सांसद नही है । बड़े या छोटे किसी भी राजनीतिक दल ने आज तक एक भी कुम्हार जाति के व्यक्ति को देश की सर्वोच्च अदालत यानि संसद में भेजने के लिए टिकट तक नही दिया । यानि आज भी प्रजापति (कुम्हार) जाति राजनीतिक रूप से भी अछूत है । फिर उसके मौलिक अधिकार यानि अनुसूचित जाति में शामिल करने से परहेज क्यों ?
यदि सामाजिक परिवेश की बात करें तो कुम्हार समाज वर्षों से दबा-कुचला हुआ है और आज भी उसके साथ समाज के अगड़े लोगों द्वारा वही व्यवहार किया जा रहा है । देश के कर्णधार/कानूनविद् इस समाज से क्या अपेक्षा करते हैं ? आज यदि प्रजापति समाज अनुसूचित जातिवर्ग में सम्मिलित होने के लिए अपनी आवाज उठाता है तो उसको बलपूर्वक क्यों दबा दिया जाता है ?
इस लेख के माध्यम से मैं प्रजापति समाज को आह्वान करता हूँ कि समाज ने हमें अनुसूचित केवल व्यवहारिक रूप में माना है। कानूनी रूप से नही । अपना अधिकार लेने के लिए प्रजापति समाज को बलिदान तो देना ही होगा ।
 प्रजापति डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
पूर्वसदस्य-उत्तराखण्ड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग,देहरादून। कैम्प-खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर
फोन-(05943)250207, मो0-09368499921

14 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

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  2. aapne bahut achhi jaankari di vaise arakshan ke baare me mujhe adhik jaankari nahi hai

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  3. Prajapati is not a shedule caste we are the child of "Daksh Prajapti" who is the Grandfather of "Lord Shiva". We have the power of "Tona Totka" in our hands to remove the disease of "Gana" and "Galseu". So We are not able to join the SC caste because "Ghumar" is the only person who create "Pitcher" for King and Shedule Caste equally.

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  4. gyanwardhak jaankari ke liye dhanybad. Prajapati ko SC ka darza milna chahiye.

    SUJAN PANDIT

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    उत्तर
    1. जब महाभारत का काल था तब लोहे और प्लास्टिक के बरतन नहीं होते थे उस समय में भी प्रजापति को भक्त जी उपाधि मिल चुकी थी लेकिन जब से प्लास्टिक के और चीनी मिट्टी के बरतन आऐ है तब से मिट्टी के बरतन की कोई value ही नहीं रही....
      NOTE:- अब Court Marriage का culture पूरे भारत में तेजी से फैल रहा आने वाले कल मे Buaramn भी आरक्षण के नाम की भीख मांगते पाओगे...
      अगर लोगों द्वारा चीनी मिट्टी के बरतन को उपयोग में लाना उचित है तो court marriage भी उचित है, आप लोगो को court marriage के खिलाफ आवाज उठाने का हक़ नहीं है....
      अपनी सोच बदलो Pandit ji,,, आप कितना भी ऊँचा खूक लो वो वापस आपके मुँह पर ही गिरेगा

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  5. arashan to milana chhiyein + samaj ke bade prabudh ,yuva ko aagaen anae par hi vijay milegi, sabhi party se kinar kar len a chahiyein kyo ye hamara bhala nahi karegi

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  6. arashan to milana chhiyein + samaj ke bade prabudh ,yuva ko aagaen anae par hi vijay milegi, sabhi party se kinar kar len a chahiyein kyo ye hamara bhala nahi karegi

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  7. आपके विचार अच्छे है.लकिन उत्तम नहीं कहे जा सकते. जिस वर्ग ने दुनिया को पवित्र कलश दिया, रौशनी लिए दीपक बनाय ,निर्माण हेतु इन्टो की उत्पति की ,जिसकी बनाई वस्तुए समाज पूजा करता है. जिसने अपने आविष्कारो की रोयल्टी भी नहीं मांगी,क्या नीचता की निम्नतम उपाधियो से नवाजा जायेगा.बेसक कुम्हार को जिन्दा रहने के लिए सरकार और अन्य समाज का सहयोग चाहिए ,भीख में नहीं ,अपमान की कीमत पर भी नहीं,दया और दान पुन्य भी नहीं,इज्जत और अपनेपन से यदि सरकार या जगत सहयोग करे तो कुम्हार का काम और कदम दोनों चल सकते है.सारी दुनिया के लिया चेतावनी है की मिटटी के बर्तन देखने के लिए भावी पीढियों को मुजियम जाना पड सकता है.धर्म ग्रंथो में,विज्ञानं में,इतिहास में कुम्हार की उत्पति सर्व प्रथम प्रमाणित है.हो सकता है की कुम्हार की गिनती विलुप्त प्राय सभ्यताओ में होने लगे विश्व के मानव समुदाय से अपील है मिटटी की कला क्रति अमर रहे तो कुम्हार को मरने नहीं देना है.

    शेष राज प्रजापति
    9352358149

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  8. ham logo ka arthik astar achha nahi h jiki saaf vajah h aarksan ki kami aur dr sahab aapne thik kaha h kumahar varg ko aarksan milna chahiye jisse ye log achhi nokriya pa sake aur apna samajik jivan satar bada sake.

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  9. समय के आधार पर आज प्रजापति समाज किसी का मोहताज नहीं है युवा पीढ़ी ने अपने संघर्ष के दम पर आज अपने आप को स्थापित किया है आज हम उन सवर्ण जातियों से कही आगे है जो अपने आपको आरक्षण के आधार पर जीवित रखे है हम न तो पिछड़ी जाति में रहकर कुछ लाभ ले पाए है हम किसी की सहानुभूति का पात्र बनकर समाज का विकास नहीं चाहते जितने भी आयोग पिछड़ी जाति के विकास के लिय बने है उनके सदस्य उस सरकार के पिट्ठू बने रहते है इन आयोगों से अगर आप इनके कार्यकाल में किये गये कार्यो के बारे में सुचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी ले तो इनकी किसी सुझाव को सरकार मानना तो दूर रिपोर्ट को भी रद्दी की टोकरी में डाल देती है ये आयोग और इनके सदस्य सरकार की घंटी बजाने में व्यस्त रहते है

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  10. We dont need any help from any body .What the reservation has given to this nation. Work hard .you are not less then anybody.

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  11. प्रजापति समाज कोई अच्छूत समाज नहीं है, आपकी सोच अच्छी है लेकिन छोटी है, आपके पास सम्पूर्ण ज्ञान नहीं है।
    Sc मे आने वाली जाति के लोगों की कोई भी चीज़ को छूना गलत माना जाता था लेकिन कुम्हार द्वारा बनाऐ गए बरतनों को पूजा मे काम आते थे, ये कुम्हारों का दुर्भाग्य है कि भारत जैसे देश के लोग ही अपने कुम्हारों की निंदा करता है वरना विदेश में तो मिट्टी के बरतन बनाने के लिए लोगों के अंदर इतनी रूचि है की वहा पर लोग खुद अपने पैसे से Institute/Culture and arts की classes लेते हैं....
    मेरे नजरों में वो लोग अच्छूत है जो दोनों हाथ पैर होने के बाद भी सरकार से आरक्षण नाम की भीख मागते है...
    प्रजापति डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी अगर आपको अपने समाज की इतनी फिक्र है तो कुछ काम करो समाज के लिए, अगर आपको भीख मागनी है तो खुद के लिए मागो समाज पर किचड मत उछालो
    आप सच मे चहाते है की हमारे समाज के युवा आगे आये तो उन्हें महनत करने के लिए उत्साहित करे ना कि आरक्षण रूपी भीख मांगने के लिए...
    मै खुद प्रजापति समाज से हूँ और मैने कभी obc के आरक्षण का भी सहारा नहीं लिया क्योंकि मै अच्छे से जानता हूँ कि आरक्षण किसी जहर से कम नहीं है समाज के लिए भी और देश के लिए भी

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