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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

सब तुम्हें भी पता, सब हमें भी पता। (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)


सब तुम्हें भी पता, सब हमें भी पता।

क्या पता किससे, कितनी हुई थी खता।

प्यार दिल में बसाकर भी गम्भीर था,

अपनी आँखों में लाया नही नीर था,

छोड़ क्यों चल दिये, दो हमें भी बता।।

क्या पता किससे, कितनी हुई थी खता।

कल तलक तो हमारी, डगर एक थी।

लक्ष नजदीक था जब, नजर नेक थी।

तुम मुकर जाओगे, यह नही था पता।।

क्या पता किससे, कितनी हुई थी खता।

याद करती तुम्हें, गाँव की सब गली।

राह पहचानती हैं, जहाँ तुम चली।

भूल जाओगे उनको, नही था पता।।

क्या पता किससे, कितनी हुई थी खता।


देखने को तुम्हें नैन, बेताब हैं,

बिन तुम्हारे अधूरे हैं, पड़े ख्वाब हैं,

चैन सुख छिन गया, नींद है लापता।।
क्या पता किससे, कितनी हुई थी खता।

10 टिप्‍पणियां:

  1. THAT IS VERY GOOD LINES PLEASE LYRIC ANY SONG or Bhajan or Bhent AND SEND ME to Prajapati.Ramanuj@gmail.com

    जवाब देंहटाएं
  2. देखने को तुम्हें नैन, बेताब हैं,
    बिन तुम्हारे अधूरे हैं, पड़े ख्वाब हैं,
    चैन सुख छिन गया, नींद है लापता।।
    क्या पता किससे, कितनी हुई थी खता।

    शास्त्री जी।
    आपकी ये पंक्तियाँ दिल को भा गयी।

    जवाब देंहटाएं
  3. मयंक जी।
    आप प्रतिदिन नये-नये गीत लिखते रहें । मेरी शुभकामनाएँ हैं ।

    जवाब देंहटाएं
  4. ब्लाग पर प्रतिदिन कुछ न कुछ पढ़ने को मिलता है। ऐसे ही लिखते रहें।

    जवाब देंहटाएं
  5. सर आप बहुत अच्छा लिखते हैं। आपकी कलम में दम है। आपसे मिलना चाहता हूँ।

    जवाब देंहटाएं
  6. कहाँ छुपाकर रख छोड़े हैं,
    सुंदर-सुंदर गीत!

    मीत मिल जाएगा,
    गीत खिल जाएगा!

    जवाब देंहटाएं
  7. आदरणीय शास्त्री जी ,
    आपके गीत बहुत सरल ,भावपूर्ण और प्रवाहमय हैं .प्रायः लोग कठिन शब्दों के जाल
    बिखेर कर मन लेते हैं की बहुत अच्छी रचना लिख दी .लेकिन उन्हें समझते कितने लोग हैं .
    इस दृष्टि से आपकी रचनाये अच्छी लगीं मेरे ब्लॉग पर आने के लिए
    मैं आपका आभारी हूँ.
    हेमंत कुमार

    जवाब देंहटाएं

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